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Thursday, 23 March 2017

पाकिस्तान में जनगणना, सिख नाराज़

पाकिस्तान में दो दशकों के बाद हो रही जनगणना को लेकर सिख समुदाय के लोग नाराज हैं. वे इस बात को लेकर निराश हैं कि उन्हें जनगणना में दरकिनार कर दिया गया है.
उनका कहना है कि जनगणना के रजिस्टर में अलग से सिखों के लिए कॉलम नहीं बनाया गया जबकि दूसरे मज़हबों को लिस्ट में जगह दी गई है.
पेशावर में सिख इस मुद्दे पर शनिवार से ही विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं.
एक सिख प्रदर्शनकारी ने कहा,"हमारे समुदाय को छोड़ दिया गया है. पाकिस्तान में सिख धर्म को मानने वाले लोग रहते हैं और लोग ये बात जानते हैं. हमें ये बात बुरी लगी है. हमने कहा है कि हमारे पास पेशावर हाई कोर्ट का रास्ता बचा है. हमने कोर्ट में याचिका दायर की है."
पाकिस्तान में फिलहाल पहले चरण की जनगणना हो रही है. कहा जा रहा है कि सिखो ने ये मुद्दा देर से उठाया.
एक नौजवान सिख प्रदर्शनकारी का इसपर कहना था, "1981 में जब मतगणना हुई थी तो हमारे बुजुर्गों को भी इसके बारे में जानकारी नहीं थी. इस बार ये होना चाहिए था कि जनगणना का फॉर्म लोगों के सामने रखा जाता ताकि हमें इसके बारे में पता चलता. हमें दो-तीन दिन पहले ही इसके बारे में पता चला और हमने काम शुरू कर दिया."
पेशावर हाई कोर्ट ने याचिका दायर किए जाने के अगले दिन अपने फैसले में कहा दूसरे चरण की जनगणना में सिखों को शामिल किया जाए.
पेशावर हाई कोर्ट के वकील और सिख कार्यकर्ता राजेश कहते हैं, "ये एक ऐतिहासिक फैसला है. पेशावर हाई कोर्ट ने कहा है कि जनगणना में अभी जो फेज़ चल रहा है, उसे रोका न जाए. जब इसका दूसरा चरण शुरू हो तो इसमें सिखों का अलग से कॉलम बनाया जाए."
जनगणना में छोड़े जाने की शिकायत केवल सिखों की ही नहीं है.
पाकिस्तान के अलग-अलग हिस्सों में अन्य अल्पसंख्यक समुदाय के लोग भी नजरअंदाज किए जाने की शिकायत कर रहे हैं.
आरोप लगाए जा रहे हैं कि सरकार ने इसके लिए पहले ग्राउंड वर्क नहीं किया था.
राजेश बताते हैं कि जनगणना विभाग के लोग भी इससे बेखबर थे कि जनगणना फॉर्म में सिखों का जिक्र है या नहीं.
पेशावर के जनगणना में दफ्तर में शुरू में उन्हें बताया गया कि इसमें सिखों का कॉलम है लेकिन जब फॉर्म खोल कर देखा गया तो ये नदारद था.

शिक्षा जैसे पुनीत कार्य को व्यापार न बनने दें

स्कूल शिक्षा मंत्री कुवंर विजय शाह ने कहा है कि प्रायवेट स्कूलों में फीस वृद्धि एवं अन्य मुद्दों पर आम जनता के हितों को ध्यान रखते हुये राज्य सरकार नियम बनायेंगी। उन्होंने प्रायवेट स्कूलों के संचालकों से कहा कि वे प्रदेश में शिक्षा जैसे पुनीत कार्य को व्यापार न बनने दें। मंत्री कुवंर विजय शाह आज भोपाल में फीस में वृद्धि तथा अन्य अनुषांगिक विषय पर हुई राज्य-स्तरीय परिचर्चा को संबोधित कर रहे थे। परिचर्चा में स्कूल शिक्षा सचिव श्रीमती दीप्ति गौड़ मुखर्जी, आयुक्त लोक शक्षण श्री नीरज दुबे एवं प्रदेश के अन्य जिलों से आये प्रायवेट स्कूल के संचालक शामिल हुए।
स्कूल शिक्षा मंत्री कुवंर विजय शाह ने कहा कि बच्चों में देशभक्ति की भावना को मजबूत करने के मकसद से सरकारी स्कूलों में राष्ट्रीय ध्वज के ध्वजारोहण को अनिवार्य किया गया है। उन्होंने प्रायवेट स्कूल संचालकों से भी अपने स्कूलों में छात्रों की उपस्थिति में प्रतिदिन राष्ट्रीय ध्वज फहराने का आग्रह किया। स्कूल शिक्षा मंत्री ने कहा कि क्लास में पढ़ने वाले सभी बच्चों को बारी-बारी से आगे बैठने का मौका मिल सके, इसके लिये रोटेशन का नियम लागू किया जाये। उन्होंने कहा कि स्कूलों में उपहार स्वरूप पुस्तकें देने का भी प्रचलन बढ़ाया जाये।
मंत्री कुवंर विजय शाह ने कहा कि प्रायवेट स्कूल में फीस का निर्धारण करने के लिये पाँच स्लेब तैयार किये जाने का विचार है। स्कूल की स्थिति के आधार पर उन्हें उस स्लेब में रखा जायेगा। बैठक में बस फीस, प्रायवेट स्कूल में दिये जाने वाला दोपहर भोज, स्कूल की पाठपुस्तकें और यूनीफार्म के निर्धारण और वितरण की व्यवस्था पर भी चर्चा की गई। स्कूल शिक्षा मंत्री ने पैरेंटस मीटिंग और बाल सभा को नियमित करने की बात कही। उन्होंने कहा कि देश की संस्कृति और रीति-रिवाज की जानकारी शिक्षक अनिवार्य रूप से स्कूल लगने से पहले विद्यार्थियों को आवश्यक रूप से दें।
स्कूल शिक्षा सचिव श्रीमती दीप्ति गौड़ मुखर्जी ने कहा कि प्रदेश की शालाओं में सीबीएससी पैटर्न को वर्ष 2017-18 से चरणबद्ध तरीके से लागू किया जायेगा। उन्होंने प्रायवेट स्कूल संचालकों से प्रामाणिक एनसीआरटी की पुस्तकों को ही वितरित करवाये जाने की बात कही। आयुक्त लोक शिक्षण श्री नीरज दुबे ने कहा कि प्रदेश के प्रायवेट स्कूल संचालक के प्रतिनिधियों से वर्ष में दो बार चर्चा की जायेगी, इससे प्रदेश में जन आकांक्षाओं के अनुरूप प्रायवेट स्कूलों का संचालन हो सकेगा।

पन्ना में दीनदयाल वनांचल सेवा में नि:शुल्क शिविर

वन विभाग ने दीनदयाल वनांचल सेवा में पन्ना के दक्षिण वन मंडल के ग्राम सिहारन में आज स्वास्थ्य शिविर लगाया। शिविर में ग्राम फतेहपुर, बिलपुरा, सिहारन, सरईखेरा, मोतीडोल, झालरडुमरी, खुखलिया, वीरमपुरा, अधराड़ी, दमुईया आदिवासी क्षेत्र के निर्धन ग्रामीणों का डॉ. सचिन अहिरवार द्वारा नि:शुल्क स्वास्थ्य परीक्षण किया गया। वन परिक्षेत्र रैपुरा के बघवार में हुए स्वास्थ्य शिविर में पिपरिया, रानीपुरा, गंज, बड़ागाँव, सगौनी, घुटेही, किशनपाटन, नन्ही बघवार, बघवार, भरतला, खैरो, इटौरा, मनकोरा, मूलपारा के ग्रामीणों का डॉ. एम.एल. चौधरी द्वारा नि:शुल्क जाँच और उपचार किया गया। दोनों शिविर का ग्रामीणों ने उत्साह से लाभ उठाया।
शिविर में मरीजों को नि:शुल्क दवाई के अलावा गर्भवती महिलाओं को मातृत्व पुस्तिका और अन्य पाठय सामग्री भी दी गई। विभाग ने मरीजों को स्वास्थ्य शिविर में लाने-ले जाने तथा दोपहर भोजन की नि:शुल्क व्यवस्था भी की।

दो लाख से अधिक के नकद भुगतान पर लगने वाला टैक्स खत्म

केंद्र सरकार ने वस्तुओं ओर सेवाओं की खरीद के दौरान दो लाख रुपये से अधिक के नकद भुगतान पर लगने वाले टैक्स को खत्म कर दिया है। 1 अप्रैल से 2 लाख से ऊपर के नकद ट्रांजेक्शन पर रोक लगाने के बाद यह फैसला किया गया है।
वित्त मंत्री अरुण जेटली ने 2016-17 के बजट में विक्रेता को दो लाख से अधिक की नकद बिक्री पर एक फीसदी टैक्स लेने का अधिकार दिया था। इसमें दो लाख रुपये की सोने-चांदी की नकद खरीद पर टैक्स लगा दिया गया था। जबकि पांच लाख रुपये की ज्वैलरी कैश में खरीदने पर इस टैक्स का प्रावधान था।
हालांकि पिछले महीने पेश किए गए 2017-18 के बजट में उन्होंने तीन लाख रुपये के नकद ट्रांजेक्शन पर रोक लगा दी थी। अब इसकी सीमा घटा कर दो लाख कर दी गई है। इन दोनों प्रावधानों को लागू करने के लिए ज्वैलरी समेत सभी वस्तुओं और सामानों की खरीद के दौरान दो लाख रुपये से अधिक के नकद भुगतान पर लगने वाला टैक्स खत्म कर दिया गया है।

जिनका कोई संबल नहीं उनकी उम्मीद की किरण है महिला आयोग

अन्याय और अत्याचार से पीड़ित जिन महिलाओं का कोई संबल नहीं है, उनके लिये राज्य महिला आयोग उम्मीद की किरण है। यह बात आज महिला-बाल विकास मंत्री श्रीमती अर्चना चिटनिस ने आयोग के स्थापना दिवस समारोह में कही। श्रीमती चिटनिस ने कहा कि हमारी सोच, स्वभाव, जीवन-शैली में पश्चिमी सभ्यता का गहरा प्रभाव हो गया है। हमें केवल अच्छी बातें ग्रहण करते हुए भारतीय परम्परा, दर्शन और संस्कृति के अनुसार जीना चाहिए। विश्व में जीवन की गहराई की समझ सबसे अच्छी भारत में है। कार्यक्रम में बाल संरक्षण आयोग के अध्यक्ष श्री रघुवेन्द्र शर्मा, राष्ट्रीय महिला आयोग की पूर्व सदस्य श्रीमती सुधा मलैया, पूर्व समाज कल्याण बोर्ड अध्यक्ष श्रीमती ऊषा चतुर्वेदी भी थीं।
राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष श्रीमती लता वानखेड़े ने कहा कि आयोग ने अपनी स्थापना के 19 वर्ष पूरे कर लिये हैं। पिछले एक वर्ष में 5900 प्रकरणों का निराकरण हो चुका है। आयोग भोपाल में और विभिन्न जिलों में बेंच लगाकर प्रकरणों का त्वरित निराकरण कर रहा है। केवल वही प्रकरण लंबित हैं, जिनमें जाँच प्रतिवेदन पूरे नहीं प्राप्त हुए हैं। आयोग प्रदेश के विभिन्न जिलों में महिलाओं से जुड़ी संस्थाओं का निरीक्षण कर अपनी अनुशंसाएँ शासन को दे रहा है। श्रीमती वानखेड़े ने बताया कि एक प्रकरण में, जहाँ एक परिवार अपनी पोती के जन्म के कारण माँ और बेटी दोनों की जान का दुश्मन बन गया था, आयोग की समझाईश से संपत्ति में से आधा हक बहू और पोती को मिला है।
आयोग ने उत्कृष्ट कार्यों के लिये वरिष्ठ समाज सेविका डॉ. मीना पिम्पलापुरे, श्रीमती सुधा मलैया, सुश्री सरिता देशपांडे, श्रीमती मीरा भार्गव, श्रीमती गीता शर्मा, श्रीमती मीरा एंथोनी, लोको पायलट सुश्री भावना, श्रीमती शिवानी सैनी, श्रीमती निर्मला चौहान और आयोग के कर्मचारियों का शॉल-श्रीफल और स्मृति-चिन्ह देकर सम्मानित किया।

प्रदेश के सभी जिला चिकित्सालय में डायलिसिस की सुविधा शुरू

प्रदेश के 51 जिला चिकित्सालय में डायलिसिस की सुविधा शुरू की गयी है। लगभग 52 हजार मरीजों के डायलिसिस किये गये हैं। बीपीएल मरीजों को नि:शुल्क और एपीएल मरीजों को 500 रुपये में यह सुविधा उपलब्ध करवायी जा रही है। प्रदेश के 46 जिले में डायलिसिस क्लीनिक नोवो-नारडिस्क एजुकेशन फाउण्डेशन बैंगलुरु और 4 जिले में नोर्वाटिस संस्था मुम्बई के सहयोग से नि:शुल्क प्रचार-प्रसार और परामर्श दिया जा रहा है। लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री श्री शरद जैन ने यह जानकारी विभाग की परामर्शदात्री समिति की बैठक में दी। बैठक में विधायक श्री मुकेश नायक, श्रीमती योगिता नवलसिंग बोरकर, श्रीमती अनीता सुनील नायक और श्री सुनील कुमार तिवारी मौजूद थे।
राज्य मंत्री श्री जैन ने बताया कि प्रदेश में लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग द्वारा शासकीय चिकित्सालय में 48, सिविल अस्पताल में 32, सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में 16 और प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र में 5 प्रकार की नि:शुल्क जाँच की सुविधा उपलब्ध करवायी जा रही है। कैंसर मरीजों की कीमोथैरेपी उपचार 51 जिले के 55 चिकित्सालय में करने के लिये 105 स्टॉफ नर्सों को प्रशिक्षित किया गया है। सभी जिलों में 606 संजीवनी, 108 एम्बुलेंस वाहन संचालित हैं। इस वर्ष कुल 9 लाख 25 हजार 995 मरीजों को आपातकालीन स्थिति में परिवहन की सुविधा उपलब्ध करवायी गयी। मध्यप्रदेश राज्य बीमारी सहायता निधि से 21 चिन्हित बीमारी पीड़ित श्रेणी को 25 हजार से 2 लाख रुपये तक सहायता दी जा रही है।
बताया गया कि मुख्यमंत्री बाल ह्रदय उपचार योजना में नवजात से 18 वर्ष के बच्चों का उपचार कर लाभान्वित किया जा रहा है। वर्ष 2016-17 में जनवरी 2017 तक 2214 बच्चों का उपचार किया गया। मुख्यमंत्री बाल श्रवण योजना में जनवरी 2017 तक 415 हितग्राही को लाभान्वित किया गया। राज्य-स्तरीय मिशन इन्द्रधनुष में वर्ष 2016-17 में 17 लाख 21 हजार बच्चों एवं 5 लाख 6 हजार गर्भवती महिलाओं को लाभान्वित किया गया है। अप्रैल-मई 2016 में 44 हजार ग्राम स्तरीय महिला स्वास्थ्य शिविरों में 3 लाख गर्भवती महिलाओं सहित 17 लाख महिलाओं का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया। परीक्षण के बाद 150 महिलाओं को ब्लड ट्रांसफ्यूजन एवं 15 हजार महिलाओं को आयरन सुक्रोज इंजेक्शन एवं 3 लाख गर्भवती महिलाओं को कृमिनाशक गोलियाँ दी गयीं।
बताया गया कि स्वास्थ्य सेवाओं में आई.टी. के माध्यम से अनमोल योजना में एएनएम द्वारा समुदाय में दी जा रही सेवाओं का टेबलेट के जरिये रियल टाइम संधारण एवं अनुश्रवण किया जा रहा है। चेतना एप के माध्यम से राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम की जानकारी मोबाइल पर उपलब्ध है। जीआईएस पोर्टल के माध्यम से विभाग की ग्रामीण और शहरी संस्थाएँ जीआईएस मानचित्र पर प्रदर्शित की जा रही हैं। नर्सिंग सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार की निगरानी के लिये मोबाइल आधारित मॉनीटरिंग एप्लीकेशन तैयार किया गया है। एचआरएमआईएस मोबाइल एप्लीकेशन में स्वास्थ्य कर्मचारियों के मानव संसाधन प्रबंधन के लिये ऑनलाइन एप्लीकेशन विकसित किया गया है।
बैठक में विभाग की प्रमुख सचिव श्रीमती गौरी सिंह और आयुक्त श्रीमती पल्लवी जैन उपस्थित थीं।

रोजगार की संभावनाओं को खोजने होगा वैश्विक समिट

मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने वैश्विक रोजगार कौशल भागीदारी समिट की तैयारियों की आज विधानसभा में समीक्षा की। बताया गया कि रोजगार की संभावनाओं को खोजने वैश्विक समिट आगामी जून माह के प्रथम सप्ताह में भोपाल में किया जाएगा। इसमें लगभग 1500 से अधिक प्रतिभागी शामिल होंगे। इस अवसर पर तकनीकी शिक्षा एवं कौशल विकास राज्य मंत्री श्री दीपक जोशी, मध्यप्रदेश रोजगार निर्माण बोर्ड के अध्यक्ष श्री हेमंत विजयराव देशमुख और मुख्य सचिव श्री बी.पी. सिंह उपस्थित थे।
मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि समिट ऐसा प्लेटफार्म बने, जहाँ बेरोजगारों को रोजगार के नये अवसर और नियोजकों को कर्मियों की उपलब्धता की जानकारी मिले। यह स्व-रोजगारियों, उद्यमियों और वित्तीय संस्थानों के मध्य संवाद का मंच भी उपलब्ध करवायें। समिट रोजगार और कुशल मानव संसाधन की उपलब्धता का रोड मेप बनाये। उन्होंने विभिन्न तैयारियों की समीक्षा की।
बताया गया कि समिट आयोजक मध्यप्रदेश रोजगार निर्माण बोर्ड होगा। नोडल विभाग तकनीकी शिक्षा विभाग होगा। समिट के दौरान प्रदेश में कौशल उन्नयन के लिये संचालित संस्थाओं, उपलब्ध मानव संसाधन, रोजगार संभावना के क्षेत्र, वित्तीय सहयोग आदि विषय पर अलग-अलग सत्र होंगे। समिट में लगभग 50 से अधिक कंपनियाँ भाग लेंगी। इस दौरान महिला-बाल विकास, पर्यटन, उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं कौशल विकास, वाणिज्य-उद्योग एवं रोजगार आदि विभागों के साथ रोजगार उपलब्धता के संबंध में मेमोरेंडम ऑफ अन्डरस्टेडिंग (एम.ओ.यू.) भी हस्ताक्षरित किए जाएंगे।