मानो न मानो, तालियों में छुपी है आरोग्य शक्ति

216

दो तथ्य। इन दोनों में एक अजीब सा रिश्ता है। एक ओर राजाभोज की नगरी भोपाल के बड़े ताल किनारे स्थित चिरायु अस्पताल से सैकड़ों कोरोना वायरस से संक्रमित मरीज ठीक हो रहे हैं। तो वहीं इसी नगरी में राजाभोज के ही बसाए किन्नर इस आपदा में राशन के लिए परेशान हैं। कहा जाता है कि राजा भोज के शासनकाल काल में भोपाल में भयानक सूखा पड़ा तब इसी किन्नर समुदाय ने नाच गा कर प्रार्थना की थी। परिणाम स्वरूप अच्छी बारिश हुई थी और सूखे की मार से राज्य उबर गया था।

kinnar
Google Photo

राजा भोज और उनके द्वारा निर्माण करवाये गए तालाब का भी एक किस्सा प्रसिद्ध है। कहा जाता है कि राजाभोज को कुष्ठ रोग हुआ था। इसके इलाज के लिए कई छोटी नदियों को मिलाकर वर्तमान भोपाल शहर के तालाब का निर्माण किया गया और राजा के कुष्ठ रोग का निवारण इसी ताल के जल से हुआ।

उपरोक्त दोनों तथ्य में आज भी एक समानता है। तालाब की हद में ही संचालित हो रहे चिरायु अस्पताल में सैकड़ों कोरोना संक्रमित मरीज ठीक हो रहे है। पर आज किन्नर समुदाय इस आपातकाल की विभीषिका को भोग रहा है। तालाब न जाने कितनों की समस्या का निदान कर रहा है। तो क्यों न अब किन्नरों क़ी सेवा कर उन्हें सुविधा उपलब्ध करते हुए उनसे पुनः उनसे नाच व गायन के माध्यम से राज्य की भलाई के लिए प्रार्थना करवाई जाए।

वैसे भी दुआ भी दवा जैसी ही असरदायक होती है। खबर है कि भोपाल शहर के पुराने क्षेत्र में सैकड़ों की संख्या में किन्नर निवास कर रहे हैं जो अभावग्रस्त हो गए हैं। प्रशासन से उन्हें मदद की दरकार है। यह कदापि अतिशयोक्ति नहीं होगी कि किन्नर दुआ मांगें। क्योंकि जब हम ताली थाली बजा सकते हैं,टॉर्च जला सकते हैं तो किन्नरों से दुआ भी मंगवा सकते हैं। आखिर इस कोरोना संकट में हमें दुआ की दरकार भी है। किन्नरों कि दुआओं ने राजा भोज के राज्य की संकट से उबारने में मदद की ही थी।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here