मध्यप्रदेश में मंत्रिमंडल का विस्तार चार दिन में ! 

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आगामी चुनावी रण मालवा से सटे क्षेत्र और ग्वालियर-चम्बल सहित बुंदेलखंड के प्रभावी क्षेत्र में लड़ा जाना है जिस पर पिछले चुनावों पर आए परिणाम स्पष्ठ करते है की भाजपा की पकड़ यह बहुत कमजोर हुई है।
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पिछले दो दिनों से चल रहा बैठकों को दौर थमने का नाम नही ले रहा है, मुख्यमंत्री शिवराज को जहाँ एक ओर प्रदेश में बढ़ता कोरोना प्रकोप परेशान कर रहा है राजभवन में भी संक्रमित मरीजों की संख्या बढ़ रही है राज्यपाल निवास से 700 मी. दूर एम्प्लाई क्वार्टर्स को कंटेंटमेट जोन बनाया है वही कांग्रेस छोड़कर आये मंत्री छाती पर खड़े हुए है। मीडिया में चली सुगबुगाहट ‘उपचुनाव के बाद नरोत्तम बनेंगे सीएम’ शिवराज के लिए खासा माथा पच्ची में उलझने वाला हो गया है।
34 सदस्यों के कैबिनेट में सिंधिया खेमें के पूर्व मंत्री सहित हरदीप सिंह डंग, ऐदल सिंह कंसाना, बिसहलाल सिंह, राज्यवर्द्धन सिंह दत्तीगांव में जमावट करना बीजेपी के जमीनी कार्यकर्ता को नकारना एक चुनोती सा हो गया है। वही विंध्या में जन आवाज बन चुके राजेन्द्र शुक्ल सहित गिरीश गौतम में एक चयन में पेंच उलझा हुआ है सूत्र बताते है नारायण त्रिपाठी भी मंत्री बंगले में रहने की इच्छा दिल्ली तक बता चुके है।
वही सागर से प्रदीप लारिया, टीकमगढ़ से हरिशंकर खटीक, भोपाल से रामेश्वर शर्मा, जबलपुर से अशोक रोहाणी, इंदौर से रमेश मेंदोला,  उषा ठाकुर, ओमप्रकाश सकलेचा, यशपाल सिंह सिसोदिया, पारस जैन, मोहन यादव पर मंथन कई दौर की बैठकों में हो रहा है। वही डॉ सीताशरण शर्मा, नागेंद्र सिंह नागौद, जगदीश देवड़ा, भूपेंद्र सिंह और गोपाल भार्गव को वरिष्ठता के साथ स्थान देना मंत्रिमंडल विस्तार में उलझनों के पेंच बढ़ा रहा है।
समाधान के लिए चर्चा
सांची में पार्टी के निर्देश पर गौरीशंकर शेजवार ने प्रभुराम चौधरी को आपने निवास पर बुलाया।
भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष का कहना है केबिनेट विस्तार में उलझन नही है। अधिकतम चार दिन में विस्तार कर दिया जाएगा।

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