लॉकडाउन बेअसर, जनता हो रही परेशान

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रोशन नेमा,

लॉकडाउन लगा, राजधानी के अखबारों में ख़बर चली प्रशासन के पास बैरिकेड कम पड़ गए, अस्पातल में पलंग कम हो पड़ सकते है, फिर रिकार्ड टुटा कोरोना के मरीज 250 पार, कई प्रतिनिधि संक्रमित, सरकारी कर्मचारी-अधिकारी आए कोरोना की चपेट में, मंत्रालय में भी संक्रमण, पार्टी दफ्तर सील, जुलाई के 15 दिन में बढ़े मरीज, अस्पताल में इलाज करा रहे मुख्यमंत्री को कहना पड़ रहा है कोई भी वीवीआईपी हो मास्क नहीं लगाये तो कार्यवाही करो। मंत्री के साथ पांच लोगों से ज्यादा न रहे।

kolar road bhopal

ओह्ह्ह आपदा तो भयानक सुनाई पड़ रही है, फिर क्या चलो शहर की सोचते है, देखते है भोपाल……, अरे मियां डाउन खोल देना चाहिए सिर्फ रास्तों पर बैरिकेडिंग करके लोगों को परेशान किया जा रहा है। नहीं भैय्या लॉकडाउन का मतलब कोरोना की चेन टूटे लोग घरों में रहे व फालतू बाहर नहीं निकले। निकले तो मास्क लगाएं। लेकिन सामने जो देखा वो सच है लॉकडाउन हुआ वह भी बेअसर है। प्रशासन सख्ती से इसका पालन नहीं करा पा रहा है न जनता में डर बचा है। इसके पीछे कारण क्या हो सकता है समाजसेवा का चोला पहने राजनीतिकों में इच्छाशक्ति की कमी या वोटर के प्रति उदारता या प्रशासन को कुछ लोगों का डर, कुछ तो है….

लॉकडाउन से पीठे वाले कृष्णा से लेकर घरों में काम करने वाली निजी कर्मियों सहित कई लोगों के काम धंधे बंद हो गए हैं। सब्जी किराना, मेडिकल, दूध, मैकेनिकल काम करने वाले खुश है। प्राइवेट जॉब करने वाले, अन्य धंधे करने वाले लोग परेशान है। सरकार और राजधानी का रसूखदार आला अमला लॉक डाउन का सख्ती से पालन नहीं करा पा रहा है, क्यों?
क्यों नशे का समान शराब, गुटखा, सिगरेट बिक रहा है, सडकों पर वाहनों की भीड़ किसकी है, नुक्कड़ पर ये ह्रदय सम्राटो की टोली किस सरदार की है? सब कुछ खुला खुला सा तो है, लोकडाउन के क्या मायने है या क्या आम जनता को होलीडे दिया? खोल देना चाहिए लॉक डाउन, सिर्फ शहर में बेरी कटिंग है बाइक कार रोककर चेकिंग हो रही है क्या चेकिंग से कोरोना की चेन टूटेगी?

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